जिन मामलों में कानून के तहत केवल “परिवाद” (यानी सीधे अदालत में शिकायत) का प्रावधान है, उनमें एफआईआर दर्ज करना गलत है।
लेखक एड. सत्येंद्र नाथ श्रीवास्तव हाई कोर्ट, इलाहाबाद/प्रयागराज राजीव कृष्ण ने हाल ही में पुलिस अधिकारियों को एक अहम निर्देश दिया है। यह निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद जारी किया गया, जिसमें साफ कहा गया कि जिन मामलों में कानून के तहत केवल “परिवाद” (यानी सीधे अदालत में शिकायत) का प्रावधान है, उनमें एफआईआर दर्ज करना गलत है। दरअसल, कई बार पुलिस बिना कानूनी प्रावधान देखे ही एफआईआर दर्ज कर लेती है। इससे आरोपी को कोर्ट में फायदा मिल जाता है और पूरी जांच कमजोर पड़ जाती है। इसी गलती को गंभीर मानते हुए डीजीपी ने सभी थानों को चेतावनी दी है कि पहले यह जांच लें कि मामले में एफआईआर बनती भी है या नहीं। नीचे उन सभी अधिनियमों (1 से 32) का संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट विवरण मानवीय अंदाज़ में दिया जा रहा है, ताकि आसानी से समझा जा सके कि इनमें सामान्यतः “परिवाद” (Complaint Case) का प्रावधान क्यों माना जाता है: 1. घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 यह कानून महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक हिंसा से सुरक्षा देता है। इसमें पीड़िता सीधे मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन द...