अनुशासनात्मक दंड अपराध के अनुरूप होना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने रिटायर के बाद दी गई सजा में किया संशोधन
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट अनुशासनात्मक दंड अपराध के अनुरूप होना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने रिटायर के बाद दी गई सजा में किया संशोधन पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई में लगाया गया दंड सिद्ध कदाचार की गंभीरता के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने रिटायरमेंट के बाद वेतनमान में 21 चरणों की कटौती के दंड को अत्यधिक मानते हुए उसमें संशोधन किया। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा, “अनुशासनात्मक कार्यवाही में हस्तक्षेप का दायरा अत्यंत सीमित है। यह स्थापित विधि है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह हाइकोर्ट तभी हस्तक्षेप कर सकता है जब निष्कर्ष मनमाने, असंगत, प्रक्रियात्मक त्रुटि से ग्रस्त या स्पष्ट पूर्वाग्रह से प्रभावित हों। अदालत का दायित्व केवल यह सुनिश्चित करना है कि निष्कर्ष अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री से समर्थित हों, कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप हुई हो तथा दंड कदाचार के अनुपात में हो।” अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुपातिकता का सिद्धांत यह मांग करता है कि अनुशासनात्मक कार्यवाही में कर्मचारी पर लगाया गया दंड सिद्ध कदाचार की गं...