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डॉ. नित्यानंद जी : हिमालय पुत्र और उत्तराखंड राज्य के प्रणेता...

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 डॉ. नित्यानंद जी : हिमालय पुत्र और उत्तराखंड राज्य के प्रणेता...  डॉ. नित्यानंद  जी उत्तराखंड के प्रणेता थे, जिन्होंने RSS के माध्यम से राज्य आंदोलन को दिशा दी। आगरा जन्मे इस शिक्षाविद ने हिमालय सेवा में जीवन समर्पित किया, मनेरी में सेवा आश्रम बनाया।   डॉ. नित्यानंद जी सही मायने में हिमालय पुत्र थे जिनके अथक प्रयासों से उत्तराखंड का गठन हो सका। उन्होंने आजीवन सच्चे स्वयंसेवक का कर्तव्य निभाते हुए भावी पीढ़ी के लिए आदर्श प्रस्तुत किया। आगरा में जन्म लेने के बाद भी डॉ. नित्यानंद ने अपना पूरा जीवन हिमालय की सेवा में समर्पित कर दिया। वह पर्वतीय क्षेत्र से मैदानी जिलों में बसने वालों के लिए बेमिसाल उदाहरण थे। सही अर्थों में कहें तो डॉ. नित्यानंद उत्तराखंड राज्य के प्रणेता थे। शिक्षाविद और समाजसेवी थे डॉ नित्यानंद स्व. डॉ. नित्यानंद जी प्रख्यात शिक्षाविद एवं समाजसेवी थे। उनका जन्म आगरा में हुआ लेकिन उन्होंने उत्तराखंड को अपनी कर्मभूमि बनाया। नित्यानंद जी ने एक साधक की तरह मन, वचन और कर्म से समाज की सेवा की और अवकाश प्राप्ति के बाद वे कुछ समय के लिए संघ की योजना से आग...

जब RSS के तीसरे सरसंघचालक ने संघ से ले ली थी 7 साल की छुट्टी

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 जब RSS के तीसरे सरसंघचालक ने संघ से ले ली थी 7 साल की छुट्टी डॉ हेडगेवार ने न केवल गुरु गोलवलकर में अपना उत्तराधिकारी ढूंढ लिया था बल्कि बाला साहबे देवरस में उन्हें संघ के अगली पीढ़ी का नेतृत्व नजर आ रहा था. देवरस उन बालकों में थे जो संघ के साथ सबसे पहले जुड़े थे. उनके कार्यकाल में एक ऐसा मौका आया जब उन्होंने संघ के सरसंघचालक के पद से 7 साल की छुट्टी ले ली थी. आमतौर पर राजनीतिक पार्टियों में ये देखने में आता रहा है कि नेताओं में आपसी मतभेद हों तो पार्टियां या तो टूट जाती हैं, या कोई नेता इस्तीफा दे देता है या ले लिया जाता है. कांग्रेस अब तक 66 बार से भी अधिक बार टूट चुकी है, लेकिन कोई भी ऐसी पहली घटना यानी कांग्रेस के 1907 के सूरत अधिवेशन को नहीं भूलता. ना ही गांधीजी से मतभेद के बाद नेताजी बोस का 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में अध्यक्ष पद से इस्तीफा. हालिया राजनीति में केजरीवाल के साथियों का एक एक करके छोड़ना या उन्हें निकाल देना आज की पीढ़ी ने देखा है. मंत्री पद जाने के बाद जिस तरह आर के सिंह ने बीजेपी के खिलाफ बिहार चुनाव में मोर्चा खोला, उसके चलते उनका इस्तीफा हो गया. ऐसे में सरसं...
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   Story Of Akshita Gupta Who Became Ias From Mbbs Doctor To Upsc Preparation Inspiring Journey दिन में डॉक्टरी और रात में UPSC की तैयारी, पॉकेट नोट्स लेकर चलती थीं डॉ. अक्षिता, पहली बार में बन गईं IAS IAS Success Story: यूपीएससी की तैयारी के लिए दिन में डाॅक्टरी करते-करते भी पढ़ाई का समय निकाला। रात में तैयारी पर पूरा फोकस करने वाली डाॅ. अक्षिता पहली बार में IAS बनी थीं। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक-69 कै साथ सिविल सेवा परीक्षा पास की थी। साभार - शुभम नवभारतटाइम्स.कॉम Hhh दिन में मरीजों का इलाज और रात में ऐसे सपने का पीछा करती थीं, जिसके लिए अनुशासन, त्याग, धैर्य और अटूट विश्वास की जरूरत थी। डाॅ. अक्षिता (Dr. Akshita Gupta) की कहानी हिम्मत और सपनों को जीना सिखाती है। अस्पताल में डाॅक्टरी करते-करते वह यूपीएससी की तैयारी के लिए कुछ समय अपने बचा लेती थीं। ब्रेक में भी जेब में नोट्स रखकर चलतीं और अपने पक्के इरादे के साथ आगे बढ़ती थीं। फिर एक दिन उनका सबसे खूबसूरत सपना पूरा हो गया जब उन्होंने अपने पहले प्रयास में यूपीएससी में 69वीं रैंक हासिल की। इस  सक्सेस स्टोरी  में जानते ...