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संघ प्रचारक कैसा?

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 प्र. संघ प्रचारक कैसा? उ.भारत की आत्मा केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं में नहीं, बल्कि उसके सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों में निवास करती है। इस आत्मा को ‘मां भारती’ कहा गया—एक ऐसी चेतना, जो युगों से साधकों, तपस्वियों, संन्यासियों और कर्मयोगियों को अपने लिए समर्पण का आह्वान करती रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक इसी परंपरा के आधुनिक प्रतीक हैं। वे कोई साधारण कार्यकर्ता नहीं, बल्कि ऐसे कर्म-संन्यासी हैं जिन्होंने निजी जीवन, पारिवारिक सुख, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा तक का त्याग कर राष्ट्र को ही अपना परिवार माना। संघ के आजीवन अविवाहित प्रचारक, बाह्य रूप से सामान्य दिखते हैं, किंतु उनके भीतर एक अग्नि जलती रहती है—राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा और त्याग की। यह लेख उन्हीं प्रचारकों के जीवन-दर्शन, साधना, तप, संघर्ष और योगदान पर केंद्रित है, जिन्होंने मां भारती के लिए स्वयं को पूर्णतः अर्पित कर दिया। 1. प्रचारक की अवधारणा: कर्म में संन्यास भारतीय परंपरा में संन्यास का अर्थ केवल केसरिया वस्त्र धारण करना नहीं रहा। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं—“योगः कर्मसु कौशलम्।” अर्थ...

एस. एम. कॉलेज, चंदौसी प्रकरण में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद द्वारा की गई सुनवाई को माननीय उच्च न्यायालय ने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत माना

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एस. एम. कॉलेज, चंदौसी प्रकरण में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद द्वारा की गई सुनवाई को  माननीय उच्च न्यायालय ने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत माना  एस. एम. कॉलेज, चंदौसी के प्रबंधतंत्र द्वारा बर्खास्त किए गए आयोग चयनित प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. दानवीर सिंह यादव, आयोग चयनित प्राध्यापक प्रोफेसर/डॉ. प्रवीण कुमार तथा स्ववित्त पोषित योजना में कार्यरत प्राध्यापिका डॉ. गीता शर्मा की बर्खास्तगी एवं विश्वविद्यालय द्वारा जांच सुनवाईमें बहाली संबंधी प्रकरण पर सुनवाई करते हुए प्राचार्य एवं दोनों ही शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। प्रकरण में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद द्वारा की गई सुनवाई को माननीय उच्च न्यायालय ने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत माना। प्रबंधतंत्र द्वारा प्राचार्य प्रोफेसर/डॉ. दानवीर सिंह यादव, प्रोफेसर/डॉ. प्रवीण कुमार एवं डॉ. गीता शर्मा के विरुद्ध पारित बर्खास्तगी का आदेश विधिवत रूप से अमान्य करार देने के मामले को भी सही ठहराया। ************************************ महत्वपूर्ण बिंदु ************************************ -वर्तमान में रोहिलखंड विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को...

जब RSS के कार्यक्रम में आने से नेपाल के राजा को रोक दिया था भारत सरकार ने

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 जब RSS के कार्यक्रम में आने से नेपाल के राजा को रोक दिया था भारत सरकार ने ये कहानी तब की है जब अभिनेत्री मनीषा कोइराला के दादा बीपी कोइराला नेपाल के प्रधानमंत्री थे और नेपाल के राजा थे महेंद्र वीर विक्रम शाह. 1965 में आरएसएस के मकर संक्रांति उत्सव के लिए नेपाल के राजा महेंद्र वीर विक्रम शाह को भारत आना था. लेकिन तभी एक कूटनीतिक विवाद पैदा हो गया. भारत ने नेपाल के राजा को वीजा ही नहीं दिया. आखिर क्यों हुआ था ये विवाद?  नेपाल दुनिया का इकलौता हिंदू राष्ट्र रहा है. भारत के कई मंदिरों में जो अधिकार यहां के राजाओं, शंकराचार्य तक को नहीं हैं, वो नेपाल के राजाओं को मिले हैं. लोकतंत्र में ये बात अजीब लग सकती हैं, लेकिन परम्पराएं सदियों पुरानी हैं, इसलिए सम्मान बना हुआ है. ऐसे में दुनिया भर में हिंदुओं के सबसे बड़े संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का नेपाल के राजा को अपने कार्यक्रम में बुलाना स्वाभाविक घटना थी, लेकिन ये अस्वाभाविक तब बन गई, जब केन्द्र सरकार ने राजा को वीजा देने से मना कर दिया. दिलचस्प बात है कि उन दिनों केन्द्र में लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे.   मनीषा कोइराल...

हेडगेवार-गोलवलकर से भागवत तक... 100 साल में 6 सरसंघचालकों की पूरी कहानी

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 हेडगेवार-गोलवलकर से भागवत तक... 100 साल में 6 सरसंघचालकों की पूरी कहानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 1925 को दशहरा के दिन नागपुर में की गई. आरएसएस के 100 साल के सफर में छह सरसंघचालक या प्रमुख बने. डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, गोलवलकर, रज्जू भैया और मोहन भागवत तक आरएसएस के प्रमुख रहे, जिन्होंने अनेक मुद्दों से निपटने में संगठन के दृष्टिकोण में परिवर्तन किए और बदलते समय के साथ तालमेल बनाए रखने का प्रयास किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए हैं. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शाताब्दी वर्ष पर मुंबई में आयोजित व्याख्यानमाला में बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि संघ में किसी भी जाति का व्यक्ति सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है. उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख बनने के लिए अनुसूचित जाति या जनजाति होना कोई बाधा नहीं है और ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है.  मोहन भागवत ने कहा कि जब संघ की शुरुआत हुई थी तो उस वक्त संघ में ब्राह्मणों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन संगठन सभी जातियों के लिए काम करता है. संघ प्रमुख ने जोर देकर कहा कि संघ का सरसंघचालक कोई ब्राह्मण...

डॉ. नित्यानंद जी : हिमालय पुत्र और उत्तराखंड राज्य के प्रणेता...

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 डॉ. नित्यानंद जी : हिमालय पुत्र और उत्तराखंड राज्य के प्रणेता...  डॉ. नित्यानंद  जी उत्तराखंड के प्रणेता थे, जिन्होंने RSS के माध्यम से राज्य आंदोलन को दिशा दी। आगरा जन्मे इस शिक्षाविद ने हिमालय सेवा में जीवन समर्पित किया, मनेरी में सेवा आश्रम बनाया।   डॉ. नित्यानंद जी सही मायने में हिमालय पुत्र थे जिनके अथक प्रयासों से उत्तराखंड का गठन हो सका। उन्होंने आजीवन सच्चे स्वयंसेवक का कर्तव्य निभाते हुए भावी पीढ़ी के लिए आदर्श प्रस्तुत किया। आगरा में जन्म लेने के बाद भी डॉ. नित्यानंद ने अपना पूरा जीवन हिमालय की सेवा में समर्पित कर दिया। वह पर्वतीय क्षेत्र से मैदानी जिलों में बसने वालों के लिए बेमिसाल उदाहरण थे। सही अर्थों में कहें तो डॉ. नित्यानंद उत्तराखंड राज्य के प्रणेता थे। शिक्षाविद और समाजसेवी थे डॉ नित्यानंद स्व. डॉ. नित्यानंद जी प्रख्यात शिक्षाविद एवं समाजसेवी थे। उनका जन्म आगरा में हुआ लेकिन उन्होंने उत्तराखंड को अपनी कर्मभूमि बनाया। नित्यानंद जी ने एक साधक की तरह मन, वचन और कर्म से समाज की सेवा की और अवकाश प्राप्ति के बाद वे कुछ समय के लिए संघ की योजना से आग...

जब RSS के तीसरे सरसंघचालक ने संघ से ले ली थी 7 साल की छुट्टी

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 जब RSS के तीसरे सरसंघचालक ने संघ से ले ली थी 7 साल की छुट्टी डॉ हेडगेवार ने न केवल गुरु गोलवलकर में अपना उत्तराधिकारी ढूंढ लिया था बल्कि बाला साहबे देवरस में उन्हें संघ के अगली पीढ़ी का नेतृत्व नजर आ रहा था. देवरस उन बालकों में थे जो संघ के साथ सबसे पहले जुड़े थे. उनके कार्यकाल में एक ऐसा मौका आया जब उन्होंने संघ के सरसंघचालक के पद से 7 साल की छुट्टी ले ली थी. आमतौर पर राजनीतिक पार्टियों में ये देखने में आता रहा है कि नेताओं में आपसी मतभेद हों तो पार्टियां या तो टूट जाती हैं, या कोई नेता इस्तीफा दे देता है या ले लिया जाता है. कांग्रेस अब तक 66 बार से भी अधिक बार टूट चुकी है, लेकिन कोई भी ऐसी पहली घटना यानी कांग्रेस के 1907 के सूरत अधिवेशन को नहीं भूलता. ना ही गांधीजी से मतभेद के बाद नेताजी बोस का 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में अध्यक्ष पद से इस्तीफा. हालिया राजनीति में केजरीवाल के साथियों का एक एक करके छोड़ना या उन्हें निकाल देना आज की पीढ़ी ने देखा है. मंत्री पद जाने के बाद जिस तरह आर के सिंह ने बीजेपी के खिलाफ बिहार चुनाव में मोर्चा खोला, उसके चलते उनका इस्तीफा हो गया. ऐसे में सरसं...
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   Story Of Akshita Gupta Who Became Ias From Mbbs Doctor To Upsc Preparation Inspiring Journey दिन में डॉक्टरी और रात में UPSC की तैयारी, पॉकेट नोट्स लेकर चलती थीं डॉ. अक्षिता, पहली बार में बन गईं IAS IAS Success Story: यूपीएससी की तैयारी के लिए दिन में डाॅक्टरी करते-करते भी पढ़ाई का समय निकाला। रात में तैयारी पर पूरा फोकस करने वाली डाॅ. अक्षिता पहली बार में IAS बनी थीं। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक-69 कै साथ सिविल सेवा परीक्षा पास की थी। साभार - शुभम नवभारतटाइम्स.कॉम Hhh दिन में मरीजों का इलाज और रात में ऐसे सपने का पीछा करती थीं, जिसके लिए अनुशासन, त्याग, धैर्य और अटूट विश्वास की जरूरत थी। डाॅ. अक्षिता (Dr. Akshita Gupta) की कहानी हिम्मत और सपनों को जीना सिखाती है। अस्पताल में डाॅक्टरी करते-करते वह यूपीएससी की तैयारी के लिए कुछ समय अपने बचा लेती थीं। ब्रेक में भी जेब में नोट्स रखकर चलतीं और अपने पक्के इरादे के साथ आगे बढ़ती थीं। फिर एक दिन उनका सबसे खूबसूरत सपना पूरा हो गया जब उन्होंने अपने पहले प्रयास में यूपीएससी में 69वीं रैंक हासिल की। इस  सक्सेस स्टोरी  में जानते ...