शिक्षकों का नहीं हो पाएगा उत्पीड़न, यूपी सरकार ने कर दी व्यवस्था, ये एक्ट बनेगा सुरक्षा कवच

 शिक्षकों का नहीं हो पाएगा उत्पीड़न, 

यूपी सरकार ने कर दी व्यवस्था, 

ये एक्ट बनेगा सुरक्षा कवच



एडेड विद्यालयों में प्रबन्धन अब शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। यूपी सरकार ने इसको लेकर व्यवस्था कर दी है। इंटरमीडिएट एक्ट की उप धारा-3 क ही उनका सुरक्षा कवच बनकर उनकी सेवा को महफूज रखेगा।

शिक्षकों का नहीं हो पाएगा उत्पीड़न, यूपी सरकार ने कर दी व्यवस्था, ये एक्ट बनेगा सुरक्षा कवच

यूपी के एडेड विद्यालयों में प्रबन्धन अब शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। यूपी सरकार ने इसको लेकर व्यवस्था कर दी है। इंटरमीडिएट एक्ट की उप धारा-3 क ही उनका सुरक्षा कवच बनकर उनकी सेवा को महफूज रखेगा।

शासन ने उक्त धारा का स्मरण दिलाते हुए शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियमों में सेवा सुरक्षा का अलग से प्रावधान करने की मांग को औचित्यहीन करार दिया है। इस संबंध में शासन ने सोमवार को सभी जिलों के डीआईओेएस को आदेश भेज दिया है। शासन ने कहा है कि एक्ट की उप धारा-3 (क) ही शिक्षकों का सेवा कवच है, जिसे दरकिनार करना प्रबंधतंत्र और डीआईओएस के लिए बहुत मुश्किल होगा क्योंकि यह उपधारा ही शिक्षकों के सेवा सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार है। सेवा सुरक्षा की पूर्व धारा-21 की समाप्ति के बाद से अनेक जिलों में कई स्कूलों के प्रबंध तंत्रों द्वारा शिक्षकों के निलंबन से लेकर सेवा समाप्ति तक कर दिए जाने के अनेक मामले प्रकाश में आए हैं। इसको लेकर लगातार विवाद भी चल रहा है।

300 से ज्यादा शिक्षकों को दिखाया गया है बाहर का रास्ता

अलग-अलग प्रबन्धनों ने अपने स्कूलों से तीन सौ से अधिक शिक्षकों को अलग-अलग कारण बताकर बाहर का रास्ता दिखा दिया है। शिक्षकों की नौकरी समाप्त किए जाने की बढ़ती घटनाओं का मामला विधान मंडल के दोनों सदनों में उसके कई सदस्यों ने भी लगातार उठाया है। ऐसे में शासन ने इस मामले को संज्ञान में लेकर इस पर एक परिपत्र जारी कर कहा है कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए इंटरमीडियएट एक्ट-1921 की धारा- 16 (छ) की उपधारा 3 ( क) में दिए गए प्रावधान के तहत कारवाई किए जाने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

डीआईओएस द्वारा मामले को लटकाना उत्पीड़न

इस धारा के तहत कोई भी प्रबंधतंत्र बिना जिला विद्यालय निरीक्षक के पूर्व अनुमोदन या अनुमति के प्रबंधतंत्र किसी भी शिक्षक के विरुद्ध कोई दंडित कार्यवाही नहीं कर सकता। न ही किसी शिक्षक को हटा सकता है। न उसकी सेवा समाप्त कर सकता है और न ही नोटिस तक दे सकता है। न पदच्युत किया जा सकता है और न ही कोई परिलब्धियों में किसी प्रकार की कमी कर सकता है। अर्थात बिना अनुमति के की गई कार्यवाही विधि शून्य होने का प्रवधान है। आदेश में यह भी कहा गया है कि शिक्षकों के लिए इतनी सेवा सुरक्षा पहले से होते हुए भी जिला विद्यालय निरीक्षकों को प्रबंधतंत्र की ऐसी कार्रवाई को उन्हें सीधे लौटा दिए जाने के बजाय महीने तक अपने पास सुनवाई के नाम पर लटकाए रखना उत्पीड़न की श्रेणी में है।






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