संघ के कुछ प्रचारक थे जो सर्वोच्च पदों तक तो नहीं पहुंचे लेकिन सरसंघचालक उनकी उपयोगिता और योग्यता के चलते उन्हें दूर भी नहीं भेजना चाहते थे
RSS की चारदीवारी के चार चक्रधरों की रोचक कहानियां संघ के कुछ प्रचारक थे जो सर्वोच्च पदों तक तो नहीं पहुंचे लेकिन सरसंघचालक उनकी उपयोगिता और योग्यता के चलते उन्हें दूर भी नहीं भेजना चाहते थे. आज आप ऐसे चार स्वयंसेवकों/प्रचारकों की दिलचस्प कहानी जानेंगे. सभी सरसंघचालकों से जुड़ी निजी और दिलचस्प कहानियां जो आप अलग अलग किताबों, लेखों में पढ़ते हैं, वो ज्यादातर इन चारों की वजह से सामने आ पाईं. कई बार संगठन के शीर्ष पर बैठे लोगों को किसी स्वयंसेवक या प्रचारक की योग्यता या जरूरत ऐसी लगती है कि वो उन्हें किसी दुर्गम क्षेत्र में भेजने के बजाय संघ मुख्यालय पर ही रखना चाहते हैं. जैसे डॉ हेडगेवार ने गुरु गोलवलकर को पहले नागपुर की जिम्मेदारी दी, फिर संघ शिक्षा वर्ग का सर्वाधिकारी बनाया और फिर एक महीने के लिए बंगाल भी भेजा, लेकिन उन्हें लगता था कि इतने योग्य व्यक्ति को दूसरा सरसंघचालक होना चाहिए, इसलिए उन्हें सरकार्यवाह बनाकर उनका केन्द्र नागपुर ही कर दिया. गुरु गोलवलकर ने भी बालासाहब देवरस को नागपुर बुलाकर फिर कहीं नहीं भेजा क्योंकि उन्हें पता था कि संगठन को डॉ हेडगेवार के बाद अगर कोई सबसे ज्य...