हेडगेवार से भागवत तक, RSS के 6 सरसंघचालक और उनका योगदान
हेडगेवार से भागवत तक, RSS के 6 सरसंघचालक और उनका योगदान शाखा आरएसएस की मूल इकाई है, जो सामुदायिक सेवा और शारीरिक व्यायाम जैसे गतिविधियों के लिए जानी जाती है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समय के साथ बदलाव अपनाए, लेकिन हिंदू एकता और चरित्र निर्माण इसके मूल में रहे. प्रत्येक सरसंघचालक ने आरएसएस को नई दिशा दी और इसे आधुनिक बनाया. हिंदू समाज को एकजुट करना और लोगों का चरित्र निर्माण उन प्रमुख मूल्यों में से रहे हैं जिनके इर्द-गिर्द आरएसएस 1925 से घूमता रहा है. लेकिन विविध क्षेत्रों से आए इसके सरसंघचालकों ने अपनी कार्यशैली से संगठन पर अमिट छाप छोड़ी है. महाराष्ट्र के एक चिकित्सक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को दशहरा के दिन नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना की थी. उन्होंने आरएसएस की शुरुआत एक शाखा से की थी, जो इन 100 वर्षों में एक विशाल संगठन के रूप में विकसित हुआ. आरएसएस पर अध्ययन करने वाले पत्रकार सुधीर पाठक के अनुसार, पिछले 100 वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छह सरसंघचालकों या प्रमुखों में से प्रत्येक ने अनेक मुद्दों से निपटने में संगठन के द...