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Self-Financed Colleges: A Hotbed Of Corruption In Uttar Pradesh

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Self-Financed Colleges: A Hotbed Of Corruption In Uttar Pradesh ************************************ There is a nexus between politicians and education mafia, which makes these colleges breeding grounds of nepotism and corruption. An All India Survey on Higher Education carried out in 2011-12 said in its key findings that Uttar Pradesh (UP) was among six states with highest number of colleges in the country. The problem of plenty has resulted in lack of monitoring, compromise on quality of faculty and teaching being imparted in degree colleges falling in the self-finance category. As there is a nexus between politicians and education mafia, these colleges are breeding grounds of nepotism and corruption. A former chairman of the Higher Education Services Commission, UP, said that the rot in the education system set in when politicians and those with the right connections were allowed to open self-financed degree colleges with affiliation to various universities. (Self-financed degree co...
  ह्यूमन राइट्स कमीशन प्राइवेट प्रॉपर्टी के झगड़ों पर सुनवाई नहीं कर सकता: गुजरात हाईकोर्ट जारी किए निर्देश यह देखते हुए कि प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी से जुड़ी शिकायत को “किसी भी तरह से ह्यूमन राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता,” गुजरात हाईकोर्ट ने पारिवारिक प्रॉपर्टी विवाद में स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन द्वारा शुरू की गई कार्रवाई रद्द की। ऐसा करते हुए कोर्ट ने ह्यूमन राइट्स उल्लंघन के मामलों पर विचार करते समय कमीशन के अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल को रेगुलेट करने के लिए डिटेल्ड निर्देश भी जारी किए। जस्टिस निरल आर. मेहता ने कहा कि यह मामला एक “साफ उदाहरण” है, जहां स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन ने उन शक्तियों का इस्तेमाल किया, जो उसे ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन एक्ट, 1993 के तहत नहीं दी गईं। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक्ट के तहत कार्रवाई प्राइवेट सिविल झगड़ों को निपटाने के लिए नहीं है। ऐसी शिकायतों पर सुनवाई करना सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करना है। आगे कहा गया, "एक्ट और ह्यूमन राइट्स रेगुलेशन, 1994 के संबंधित प्रोविज़न को मिलाकर पढ़ने पर यह साफ़ है कि प्रतिवादी नंबर 4 ने प...
  एक ही FIR में दो अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर करने पर हाईकोर्ट ने वकील को लगाई फटकार, 50 हजार रुपये जुर्माना पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने चावल व्यापार से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में वकील की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि एक ही FIR में अलग-अलग वकीलों के माध्यम से दो अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर करना और दोनों में समान कार्यवाही लंबित न होने का हलफनामा देना फोरम शॉपिंग है और न्यायिक पवित्रता के विरुद्ध है। जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक ही FIR के आधार पर दो अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से विवेकाधीन राहत मांगी। दोनों याचिकाओं के साथ यह शपथपत्र संलग्न था कि इसी विषय में कोई अन्य याचिका दायर नहीं की गई या लंबित नहीं है। अदालत ने इस आचरण को सिर्फ प्रक्रिया संबंधी चूक नहीं, बल्कि खुला 'फोरम शॉपिंग' का प्रयास बताया। अदालत ने कहा कि न्यायिक विवेक को परखने के लिए एक ही कारण से अनेक याचिकाएं दायर करना न्याय प्रणाली के साथ छल के समान है। जस्टिस गोयल ने कहा, “हलफनामे की आवश्यकता वही आधार है जिस पर अदालत सत्य का अनुमान करती है। झूठा हलफनामा न...
 मैंने सुना है, सिकंदर जब हिंदुस्तान आता था, तो रास्ते में एक फकीर से मिल लिया था। एक फकीर था डायोजनीज। एक नंगा फकीर। गांव के किनारे पड़ा रहता था। खबर की थी किसी ने सिकंदर को, कि रास्ते में जाते हुए एक अदभुत फकीर है डायोजनीज उससे मिल लेना। सिकंदर मिलने गया है। फकीर लेटा है नंगा। सुबह सर्द आकाश के नीचे। धूप पड़ रही है, सूरज की धूप ले रहा है। सिकंदर खड़ा हो गया है, सिकंदर की छाया पड़ने लगी है। डायोजनीज पर। सिकंदर ने कहा कि शायद आप जानते न हों, मैं हूं महान सिकंदर, अलक्जंडर द ग्रेट। आपसे मिलने आया हूं। उस फकीर ने जोर से हंसा। और उसने अपने कुत्ते को, जो कि अंदर माद में बैठा हुआ था, उसको जोर से बुलाया कि इधर आ। सुन, एक आदमी आया है, जो अपने मुंह से अपने को महान कहता है। कुत्ते भी ऐसी भूल नहीं कर सकते। सिकंदर तो चौंक गया। सिकंदर से कोई ऐसी बात कहे, नंगा आदमी, जिसके पास एक वस्त्र भी नहीं है। एक छुरा भोंक दो, तो कपड़ा भी नहीं है, जो बीच में आड़ बन जाए।  सिकंदर का हाथ तो तलवार पर चला गया। उस डायोजनीज ने कहा, तलवार अपनी जगह रहने दे, बेकार मेहनत मत कर। क्योंकि तलवारें उनके लिए है जो मरने से डरत...

पहली गुरु दक्षिणा की कहानी, आखिर चंदा क्यों नहीं लेता आरएसएस?

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 पहली गुरु दक्षिणा की कहानी, आखिर चंदा क्यों नहीं लेता आरएसएस? संघ दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन है, सब जानते हैं. पर क्या कभी किसी स्वयंसेवक को चंदा मांगते देखा है? नहीं देखा होगा. क्योंकि संघ चंदा लेता ही नहीं. अब अगर चंदा नहीं लेता तो चलता कैसे है? बात उन दिनों की है जब बाला साहब देवरस सरसंघचालक थे. गोपाष्टमी का दिन था और जल्द ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक पथसंचलन होना था. पैसों की उन दिनों इतनी कमी थी कि पथसंचलन के लिए वाद्य यंत्रों या बैंड का इंतजाम नहीं हो पा रहा था. तब देवरस के साथ-साथ बाबा साहब आप्टे, दादा राव परमार्थ और कृष्णराव मुहर्रिर चार मील पैदल चलकर एक सज्जन के यहां पहुंचे, जिनकी गुरुदक्षिणा नहीं आ पाई थी. आने-जाने और आवभगत में तीन घंटे लग गए, तब जाकर उस गुरुदक्षिणा से एक बिगुल खरीदा जा सका.  ये किस्सा के आर मलकानी में अपनी किताब ‘द आरएसएस स्टोरी’ में लिखा है. संघ को 'मनी' नहीं, 'मैन चाहिए ऐसा नहीं था कि संघ के लिए तब कोई दान देने वाला नहीं था.  मदन मोहन मालवीय को उन दिनों ‘मनी मेकिंग मशीन’ कहा जाता था. एक बार वे डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से मिलने न...

कैसे गांधी भक्त महिला ने खड़ा कर दिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समानांतर संगठन

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कैसे गांधी भक्त महिला ने खड़ा कर दिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समानांतर संगठन संघ के समानांतर, इसी के आदर्शों पर काम करने वाला एक महिला संगठन भी है- राष्ट्र सेविका दल. एक गांधी भक्त महिला, लक्ष्मीबाई केलकर उर्फ 'मौसीजी' ने कैसे अकेले दम पर ये नया संगठन खड़ा किया, ये कहानी भी प्रेरणा दायक है. पहले नाम बदला, फिर सामाजिक पदनाम. वो भी एक की जगह दो-दो. पत्नी बनते ही मां भी बन गईं. उनका नाम बचपन से कमल ही था, लेकिन विदर्भ में उन दिनों विवाह के बाद नाम बदलने की परम्परा थी. सो ससुराल वालों ने उनका नाम कमल से लक्ष्मी कर दिया, लक्ष्मीबाई केलकर.  वो बेटी से केवल पत्नी ही नहीं बनीं, विवाह होते ही दो लड़कियों की मां भी बन गईं. उनके पति की पहली पत्नी से दो बेटियां थीं. कभी उन्होंने सोचा भी नहीं था कि दूसरी मां की बेटियों को संभालते हुए, उन्हें कभी देश भर की लाखों बेटियों की मां बनने का भी मौका मिलेगा. आज देश के करोड़ों परिवारों के बीच उन्हें ‘मौसीजी’ के नाम से याद किया जाता है. उनके तेवर शुरू से ही आम लड़कियों से अलग थे. देश, समाज व संस्कृति के लिए लड़कों की तरह ही कुछ करने की धुन उनके मन म...

दुनिया भर की गुप्तचर एजेंसियों के लिए किसी चर्चित या वांछित व्यक्ति को फंसाने के लिए हनी ट्रैप एक कारगर हथियार रहा है।

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 दुनिया भर की गुप्तचर एजेंसियों के लिए किसी चर्चित या वांछित व्यक्ति को फंसाने के लिए हनी ट्रैप एक कारगर हथियार रहा है। 1️⃣➡️ बात 1959 की है  19 साल की अमेरिकन लड़की होप कुक भारत आई, दार्जिलिंग के जिस होटल में वो ठहरी थी, उसी होटल में सिक्किम के युवराज पाल्देन थोंडुप नामग्याल ठहरे हुए थे, दोनों की मुलाकात हुई, प्यार हुआ और फिर मात्र 4 वर्ष दोनों ने एक बुद्ध मठ में शादि कर ली। उस समय के भारत में अमेरिकी राजदूत का इस शादी में शामिल होना काफी चर्चित रहा। इस तरह से एक सामान्य लड़की सिक्किम की महारानी बन गई। सिक्किम की महारानी बनते ही इसने भारत के विरुद्ध जहर उगलना शुरू कर दिया। सिक्किम एक स्वतंत्र देश है, भारत हमारे आंतरिक मामलों में दखल ना दे। इसके बयानों को देशी और विदेशी मीडिया भी खूब कवरेज देते थे। तब तक सिक्किम का भारत में पूर्ण रूप से विलय नहीं हुआ था। अमेरिका सिक्किम में अपना सैन्य बेस स्थापित करना चाहता था ताकि चीन और भारत दोनों पर आसानी से नजर रख सके। सिक्किम CIA के एजेंटों अड्डा बन चुका था। यहीं से बाजी पलटी:- सिक्किम की 70% से ज्यादा आबादी नेपाली मूल की थी, वो भी सिक्कि...

तब आरएसएस में होता था 'सेनापति', खाकी कमीज पहनते थे स्वयंसेवक!

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 तब आरएसएस में होता था 'सेनापति', खाकी कमीज पहनते थे स्वयंसेवक! क्या आपको पता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में कभी सेनापति भी हुआ करते थे? इतिहास में केवल एक ही व्यक्ति हुआ जो संघ का पहला और आखिरी सेनापति रहा. कई लोगों के लिए ये हैरानी भरा हो सकता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कभी कोई सेनापति भी होता था. लेकिन ये सच है और ये पद करीब 14 साल तक संघ में बनाए भी रखा गया. जब तक ये पद संघ में रहा, एक ही व्यक्ति इसपर रहा. हालांकि छत्रपति शिवाजी की परंपरा के अनुसार इस पद का नाम था, ‘सरसेनापति’. दरअसल, संघ की स्थापना के 4 साल बाद यानी नवम्बर 1929 में जब संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने नागपुर में संघ की प्रशासनिक व्यवस्था बनाई और उसमें पहले ‘सरसंघचालक’ के पद का दायित्व डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को दिया गया, तो साथ में दो और पदनाम भी रखे गए— सरकार्यवाह (महासचिव) और सरसेनापति. पहले सरसेनापति चुने गए मार्तंड राव जोग. और वही संघ के पहले व अंतिम सरसेनापति थे. संघ में क्यों था सरसेनापति? हालांकि, संघ कोई सैनिक या क्रांतिकारी प्रकृति का संगठन नहीं था. तो ऐसे में सवाल आपके मन में उठ सकता ...

UP में 95 फीसदी कॉलेजों में उच्च शिक्षा देने वाले प्रोफेसरों को नहीं मिलता न्यूनतम वेतन

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  UP में 95 फीसदी कॉलेजों में उच्च शिक्षा देने वाले प्रोफेसरों को नहीं मिलता न्यूनतम वेतन वित्तविहीन महाविद्यालयों के कई शिक्षक कुपोषण और अवसाद में मर चुके हैं, अभाव एवं और असुरक्षा के कारण देवरिया जिले के एक स्ववित्तपोषित पीजी कॉलेज के प्राचार्य ने पोखरी में डूबकर आत्महत्या भी कर ली थी, उन्हें प्राचार्य होने के बावजूद मात्र 3000 रुपए वेतन मिलता था... साभार - Janjwar Desk-जनज्वार, ब्यूरो।  Update: 2021-06-02 10:32 GMT जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट UP में 95 फीसदी कॉलेजों में उच्च शिक्षा देने वाले प्रोफेसरों को नहीं मिलता न्यूनतम वेतन मुख्यमंत्री कार्यालय का वेतन भुगतान संबंधित आदेश : इसे भी नहीं मानते अधिकांश वित्तविहीन व स्ववित्त पोषित महाविद्यालय उच्च शिक्षा में सुधार के तमाम सरकारी दावे के बाद भी उत्तर प्रदेश के शिक्षण संस्थानों की स्थिति काफी खराब है। राज्य के ऐसे संस्थानों में अध्ययनरत तकरीबन 48 लाख से अधिक छात्र में से 95 फीसद वित्तविहीन मान्यता प्राप्त महाविद्यालय व स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम आधारित महाविद्यालय में पढ़ते हैं। जहां के अधिकांश शिक्षकों को सरकार के द्वारा घोष...

कभी भी ये भ्रम न पालें कि... मै न होता, तो क्या होता ?

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 अशोक वाटिका" में जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा, तब हनुमान जी को लगा, कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सर काट लेना चाहिये! किन्तु, अगले ही क्षण, उन्हों ने देखा "मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया ! यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि यदि मै न होता, तो सीता जी को कौन बचाता? बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मैं न होता, तो क्या होता ? परन्तु ये क्या हुआ? सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया! तब हनुमान जी समझ गये, कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं! आगे चलकर जब "त्रिजटा" ने कहा कि "लंका में बंदर आया हुआ है, और वह लंका जलायेगा!", तो हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये, कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है, और त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है, एक वानर ने लंका जलाई है! अब उन्हें क्या करना चाहिए? जो प्रभु इच्छा! जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमान जी को मारने के लिये दौड़े, तो हनुमान ने अपने को बचाने के ...

संघ प्रचारक कैसा?

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 प्र. संघ प्रचारक कैसा? उ.भारत की आत्मा केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं में नहीं, बल्कि उसके सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों में निवास करती है। इस आत्मा को ‘मां भारती’ कहा गया—एक ऐसी चेतना, जो युगों से साधकों, तपस्वियों, संन्यासियों और कर्मयोगियों को अपने लिए समर्पण का आह्वान करती रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक इसी परंपरा के आधुनिक प्रतीक हैं। वे कोई साधारण कार्यकर्ता नहीं, बल्कि ऐसे कर्म-संन्यासी हैं जिन्होंने निजी जीवन, पारिवारिक सुख, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा तक का त्याग कर राष्ट्र को ही अपना परिवार माना। संघ के आजीवन अविवाहित प्रचारक, बाह्य रूप से सामान्य दिखते हैं, किंतु उनके भीतर एक अग्नि जलती रहती है—राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा और त्याग की। यह लेख उन्हीं प्रचारकों के जीवन-दर्शन, साधना, तप, संघर्ष और योगदान पर केंद्रित है, जिन्होंने मां भारती के लिए स्वयं को पूर्णतः अर्पित कर दिया। 1. प्रचारक की अवधारणा: कर्म में संन्यास भारतीय परंपरा में संन्यास का अर्थ केवल केसरिया वस्त्र धारण करना नहीं रहा। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं—“योगः कर्मसु कौशलम्।” अर्थ...

एस. एम. कॉलेज, चंदौसी प्रकरण में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद द्वारा की गई सुनवाई को माननीय उच्च न्यायालय ने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत माना

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एस. एम. कॉलेज, चंदौसी प्रकरण में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद द्वारा की गई सुनवाई को  माननीय उच्च न्यायालय ने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत माना  एस. एम. कॉलेज, चंदौसी के प्रबंधतंत्र द्वारा बर्खास्त किए गए आयोग चयनित प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. दानवीर सिंह यादव, आयोग चयनित प्राध्यापक प्रोफेसर/डॉ. प्रवीण कुमार तथा स्ववित्त पोषित योजना में कार्यरत प्राध्यापिका डॉ. गीता शर्मा की बर्खास्तगी एवं विश्वविद्यालय द्वारा जांच सुनवाईमें बहाली संबंधी प्रकरण पर सुनवाई करते हुए प्राचार्य एवं दोनों ही शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। प्रकरण में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद द्वारा की गई सुनवाई को माननीय उच्च न्यायालय ने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत माना। प्रबंधतंत्र द्वारा प्राचार्य प्रोफेसर/डॉ. दानवीर सिंह यादव, प्रोफेसर/डॉ. प्रवीण कुमार एवं डॉ. गीता शर्मा के विरुद्ध पारित बर्खास्तगी का आदेश विधिवत रूप से अमान्य करार देने के मामले को भी सही ठहराया। ************************************ महत्वपूर्ण बिंदु ************************************ -वर्तमान में रोहिलखंड विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को...

जब RSS के कार्यक्रम में आने से नेपाल के राजा को रोक दिया था भारत सरकार ने

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 जब RSS के कार्यक्रम में आने से नेपाल के राजा को रोक दिया था भारत सरकार ने ये कहानी तब की है जब अभिनेत्री मनीषा कोइराला के दादा बीपी कोइराला नेपाल के प्रधानमंत्री थे और नेपाल के राजा थे महेंद्र वीर विक्रम शाह. 1965 में आरएसएस के मकर संक्रांति उत्सव के लिए नेपाल के राजा महेंद्र वीर विक्रम शाह को भारत आना था. लेकिन तभी एक कूटनीतिक विवाद पैदा हो गया. भारत ने नेपाल के राजा को वीजा ही नहीं दिया. आखिर क्यों हुआ था ये विवाद?  नेपाल दुनिया का इकलौता हिंदू राष्ट्र रहा है. भारत के कई मंदिरों में जो अधिकार यहां के राजाओं, शंकराचार्य तक को नहीं हैं, वो नेपाल के राजाओं को मिले हैं. लोकतंत्र में ये बात अजीब लग सकती हैं, लेकिन परम्पराएं सदियों पुरानी हैं, इसलिए सम्मान बना हुआ है. ऐसे में दुनिया भर में हिंदुओं के सबसे बड़े संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का नेपाल के राजा को अपने कार्यक्रम में बुलाना स्वाभाविक घटना थी, लेकिन ये अस्वाभाविक तब बन गई, जब केन्द्र सरकार ने राजा को वीजा देने से मना कर दिया. दिलचस्प बात है कि उन दिनों केन्द्र में लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे.   मनीषा कोइराल...