सरकार और व्यवस्था ऐसे गुमनाम योद्धाओं को सिर्फ़ “कॉन्ट्रैक्ट वर्कर” न माने, बल्कि उन्हें सम्मान, सुरक्षा, बीमा और बेहतर भविष्य दे।
*PLEASE READ IT BEFORE YOU DELETE IT OR FORWARD TO MORE LIKEMINDED INDIANS* 🇮🇳 🫡 🇮🇳 *इस वर्णन को दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर स्तर पर काम करने वाले एक युवा टूरिस्ट, जो अपने परिवार के साथ एक सप्ताह की छुट्टियाँ बिताने लद्दाख पहुँचा था, प्रेषित किया है.....* *ऊँचे पहाड़, बर्फ़ से ढकी चोटियाँ और ख़ामोशी सब कुछ जैसे किसी और ही दुनिया का एहसास करा रहा था। उनकी यात्रा के लिए जो स्थानीय ड्राइवर मिला, वह करीब अट्ठाईस वर्ष का लद्दाखी युवक था। शांत चेहरा, सधी हुई आवाज़ और आँखों में पहाड़ों जैसी गहराई। उसके घर परिवार में उसके बूढ़े माता–पिता, पत्नी और दो छोटी बेटियाँ थीं।* *हिमालय के भीतर, संकरी और बर्फ़ीली सड़कों पर आगे बढ़ते हुए बातचीत शुरू हुई.....* *टूरिस्ट ने सहज उत्सुकता से पूछा—* *“जैसे ही यह हफ्ता ख़त्म होगा, यहाँ टूरिस्ट सीज़न भी ख़त्म हो जाएगा। फिर आप क्या करेंगे ? क्या आप भी बाकी लोगों की तरह किसी बड़े शहर- गोवा, दिल्ली या कहीं और होटल में काम करने चले जाते हैं ?”* *लद्दाखी युवक ने बिना किसी शिकवे के उत्तर दिया.....* *“नहीं साहब, मैं यहीं रहता हूँ। सर...