एस. एम. कॉलेज, चंदौसी, जनपद-संभल में आयोग चयनित नियमित प्राचार्य एवं प्रबंधतंत्र के बीच विवाद प्रकरण प्रबंधतंत्र की हठधर्मिता, निरंकुश्ता, स्वेच्छाचारिता, असहयोगात्मक रवैया तथा कॉलेज में शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुशासन बनाए रखने को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा महाविद्यालय में प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त करने की संस्तुति -प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार की शिकायत पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में हुई सुनवाई में लिया गया निर्णय -उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष माननीय सूर्य प्रकाश पाल की न्यायपीठ में हुई थी सुनवाई - न्यायपीठ ने 25 अगस्त, 2025 को लिया था निर्णय, जो 4 दिसम्बर, 2025 को जारी किया गया -प्रकरण में विधिक कार्यवाही करने तथा डॉ. प्रवीण कुमार को नियमानुसार देय वेतन धनराशि का तत्काल प्रभाव से एवं नियमित रूप से भुगतान करने के आदेश एस. एम. कॉलेज, चंदौसी, जनपद-संभल के प्रबंधतंत्र, प्राचार्य, सचिव की शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों के संदर्भ में विश्वविद्यालय में की जा रही सुनवाई में प्रबंध समिति के असहयोगात्मक स्वेच्छाचारिता, ...
वर्तमान शिक्षा व्यवस्था असभ्यता को पोषित कर रही है उस असभ्यता का एक ही कारण है, शिक्षक को रीढ़ विहीन कर दिया जाना, उसे सरकार और मैनेजमेंट द्वारा नौकर के रूप में डील करना। शिक्षकों को एयरपोर्ट, शौचालय और सांड़ गिनने में लगाकर, फैशन शो की तैयारी का जिम्मा देकर कोई भी समाज यदि सोचता है कि आने वाली पीढ़ी सुशिक्षित होगी तो यह उसका भ्रम है। हैप्पीनेस क्लास जैसे तमाम पाखंडपूर्ण कार्यक्रमों के चलते पढ़ाई को एकदम मनोरंजन का रूप दिया जा रहा है। निजी कॉलेज और विश्वविद्यालयों को होटल बनाया जा रहा है। इनसे कोई उम्मीद नही कि ये मर्यादा, अनुशासन वाले स्टूडेंट प्रोड्यूस करेंगे। हमें याद करने की जरूरत है कि जिस सरकारी शिक्षा ने आठवें दशक के अवसान तक गांवों-कस्बों से कनस्तर में उदरपूर्ति और कंधे पर बिस्तरबंद में ओढ़ने-बिछाने का सामान लेकर घर से निकले छात्रों में ही वैज्ञानिक, डाक्टर और इंजीनियर आर्थिक लाचारियों के बावजूद गढ़े थे, वहीं शिक्षा जब मात्र व्यापार के हवाले हो गयी तो डाक्टर,इंजीनियर बनने के लिए प्रतिस्पर्धा योग्यता की बजाए, पच्चीस-पचास लाख रूपये धनराशि की अनिवार्य शर्त हो गई...
नवनियुक्त प्रार्चायों को रास नहीं आ रहे यूपी के डिग्री कॉलेज, साल भर में 100 ने दिया इस्तीफा उत्तर प्रदेश के डिग्री कॉलेज (degree college) नवनियुक्त प्रार्चार्यों को रास नहीं आ रहा है. इसलिए एक साल में ही 100 से अधिक प्राचार्य (100 out of 290 resigned in a year) ने नौकरी छोड़ दी है. आइए जानते हैं, ऐसा क्या है कारण? सौ प्राचार्य ने छोड़ी नौकरी उत्तर प्रदेश में सरकार की सहायता से चलने वाले डिग्री कॉलेज में नव नियुक्त प्राचार्यों को नई नौकरी भा नहीं रही है. तभी तो एक साल के अंदर 296 में करीब 100 ने अभी तक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. जबकी इन डिग्री कॉलेज में करीब दो दशक से स्थाई प्राचार्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया साल 2021 में पूरी की गई थी. दरअसल, प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा आयोग को राज्य में सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज में अस्थाई प्रधानाचार्य के स्थान पर स्थाई प्रधानाचार्य की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने को कहा था. सरकार के आदेश के बाद आयोग ने साल 2015 और 2017 में निकल गए अपने विज्ञापन को समायोजित कर साल 2021 में प्रदेश के सभी डिग्री कॉलेज में खाली प्राचार्यों के पदों को भरने...
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